ECG क्या होता हैं और ये क्यों जरूरी हैं ।


नमस्कार 🙏 दोस्तों,आपका हमारे hindiji.net में एक बार फिर से स्वागत 🙇  हैं।

आज हम बहुत ही खास टॉपिक को लेकर आये है जो आज के समय में बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है।

आजकल के बदलते और भागदौड़ भरी लाइफ में और इन सब के बीच में इंसान ने सबसे आगे बढ़ने की अपनी रफ्तार बहुत तेज कर दी है।

जिस वजह से इंसान अपना खान पान की तरफ कम ध्यान दे रहा है और पेट भरने के लिये कुछ भी खाए चला जा रहा है, और इस वजह से हमारे दिल का काम बहुत बढ़ गया हैं।

जिस वज़ह से आजकल बहुत से बीमारियों ने जन्म ले लिया है और इन बिमारियों में से सबसे खतरनाक है दिल से जुड़ी बीमारियाँ ।

अगर दिल ही सेहतमंद नही रहेगा तो पुरा शरीर कैसे काम कर पायेगा।

और आज हम इस आर्टिकल में दिल से जुडे एक टेस्ट के बारें में बात करेंगे। जिसका नाम हैं ECG.

ECG क्या है,ECG का फुल फॉर्म क्या है ,ECG क्यो किया जाता है, ECG से होने वाले नुक्सान, ECG कब करना चाहिये, ECG कितने प्रकार की होती है।

आप भी इसे पुरा पढ़कर हमारे साथ जानिए।



ECG क्या होता है |ECG FULL FORM

दोस्तों ECG का फूल फॉर्म ELECTROCARDIOGRAM होता है और इसे शार्ट में ईसीजी भी बोला जाता है।

कई बार इसे EKG भी लिखा जाता है।

 ECG और EKG दोनों एक ही को बोला जाता है।

ECG एक मशीन है जिसका प्रयोग मेडिकल फील्ड/ हॉस्पिटल में मरीजों की बीमारियों का पता लगाने के लिए किया जाता है।

इसकी मदद से आमतौर पर दिल से संबंधित बिमारियों का पता लगाने के लिये उपयोग किया जाता है जिससे ये पता चलता है की हमारा दिल ठीक से काम कर रहा है की नही।


ECG कितने प्रकार का होता है | TYPES OF ECG

मुख्यतः ECG तीन प्रकार के होते है जैसे-

1. रेस्टींग ECG (Resting ECG)

2. अम्बुलेटरी ECG (Ambulatory ECG)

3. स्ट्रेस या एक्सरसाइज ECG (Stress or Exercise ECG)


1. रेस्टींग ECG- ये ECG का पहला स्टेज हैं जिसमें बहुत से मरीजों का ECG टेस्ट करवाया जाता है। ये ECG तब कराया जाता है जब मरीज आरामदायक स्थिति में लेट सके और बैठ सके ।


2. अम्बुलेटरी ECG- इस टेस्ट में मरीज के धड़कनो की निगरानी करने के लिये किया जाता है।इसमें मरीज के कमर में एक छोटी सी (पोर्टेबल) मशीन लगाई जाती है ताकि ये मशीन हृदय की धड़कन को चेक करके रिकॉर्ड करता रहता है। इस मशीन के लगने के बाद मरीज मशीन के साथ घर भी जा सकता है और छोटी मोटी दिनचर्या भी कर सकता हैं । इसमें मरीज के हृदय का पता चलता है की धड़कन की गति कब और कैसे बढ़ रही है।


3. स्ट्रेस और एक्सरसाइज़ ECG 

यह टेस्ट उस वक्त कराया जाता है जब मरीज ट्रेडमिल या व्यायाम बाईक इस्तेमाल करने के लिये बोला जाता है।


ECG क्यों किया जाता है?

सबसे मुख्य बात ये आता है की ECG आखिर क्यों किया जाता है।

जैसे की आप सब को पता ही है की हमारा दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है जो हमारे परिसंचारण प्रणाली के मध्य में स्थित है और धड़कते हुये शरीर के चारो और रक्त को पहुँचाता है।

जिससे हमारे शरीर में ओक्सिजन और पोषक तत्वों की पूर्ति होती है।

अगर इस दिल में ही कुछ गडबडी हो जायें या फिर ढ़्ंग से काम करना बंद कर दे तो ये आप या हम जैसे आम इंसान को कैसे पता चलेगा की हमें क्या दिक्कत है ओर क्यों हो रही है।


हम सब सबसे पहले तो डॉक्टर के पास जाएंगे ओर उन्हें अपनी दिक्कत बतायेंगे तब डॉक्टर हमें ये ECG करने को बोलेंगे।


ECG कब कराया जाता है?

जब आप अपने डॉक्टर को अपने बताए गए निम्न दिक्कतों को बताएंगे जैसे-

• साँस लेने में कठिनाई ।

• जब लगातार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है।

• सीने में भारीपन और बेचेनी के साथ दर्द की शिकायत रहें ।

• कमजोरी महसूस होना

• हृदय की धड़कन असामान्य हो और लगातार घटती और बढ़ती रहे।

• हार्ट अटैक 

• दम फूलना

• हृदय से असामान्य ध्वनि सुनाई देना।



ECG टेस्ट कराने से क्या पता चलता है?

ECG कराने से हमे और डॉक्टरों को निम्नलिखित बातों का पता चलता है जैसे-

• हार्ट बीट नॉर्मल है की नही।

• हार्ट सही से काम कर रहा है की नही।

• हार्ट अटैक के कारणों का भी पता चलता हैं ।

• हृदय के कौन सा हिस्सा कितना खराब हुआ है।

• हृदय का साइज़

• बीते समय की हार्ट अटैक का पता लग जाता है।


ECG के नुक्सान

दोस्तों, इस ECG टेस्ट का कोई भी नुक्सान नही होता है क्योकिं ये टेस्ट शरीर के बाहर से किया जाने वाला टेस्ट है जो शरीर में किसी भी तरह का नुक्सान नही पहुचाता है।

बस इसमें ईलेक्टरॉड के थोड़े बहुत निशान पड़ जाते है जो बाद में खुद ब खुद ठीक हो जाते है।

ये कोई बड़ी समस्या वाली बात नही है।


ECG कैसे किया जाता है?

हमने आपकों ECG के प्रकार बताएं है जिसमें रोग के अनुसार ECG किया जाता है ।

परंतु आमतौर पर जो डॉक्टर ECG करने के लिये बोलते है वो रेस्टींग ECG होता है जिसमें मरीज को बिस्तर में सामान्य तौर पर लेटाया जाता है और उनके छाती के तरफ के कपड़ों को ऊपर तक हाटया जाता है ।

और 2-2 ईलेक्टरोड्स दोनों हाथों और पावो में लगाया जाता है और 6 ईलेक्टरोड्स छाती में एक जैल की सहायता से चिपकाये जाते है ये सारे ईलेक्टरोडस ECG मशीन से जुडे होते है जिसे स्टार्ट करने पर ECG मशीन से एक कागज के मदद से हृदय की गतिविधियों का ग्राफ बन कर निकलता है।


ECG कौन -कौन करा सकता हैं?

जिन्हें दिल से जुडे बीमारियाँ है या फिर होने वाले है वो तो करवाते ही है।

परंतु एक स्वस्थ्य इंसान भी ECG करा सकता है।

ये भी रूटीन चेकअप का ही हिस्सा है।

और भविष्य में होने वाले बिमारियों का संकेत का भी पता चल जाता है।

दोस्तों ECG का इस्तेमाल किसी भी तरह की सर्जरी से पहले भी किया जाता है।

ECG कराने का खर्च?

ECG कराने में ज्यादा पैसे नही लगता है ये किसी भी हॉस्पिटल में 200 से 350 के बीच में हो जाता है।

परंतु किसी-किसी हॉस्पिटल में अपनी अलग पॉलिसी होती है वैसे ही सब हॉस्पिटल में ECG टेस्ट का अलग-अलग प्राइस होता है।


दोस्तों आज हमने आपकों अपने आर्टिकल में ECG से जुड़े जानकारी के बारें में बताया है।

आशा करते हैं आपकों ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद